My First Kashmir Journey – A Memorable Experience (2016)
My name is yogendra
साल 2016 में मुझे पहली बार कश्मीर जाने का अवसर मिला। उस समय मैं बी.कॉम. सेकंड ईयर का छात्र था। गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थीं और मेरे बड़े भाई, जो एक ट्रैवल कंपनी में कार्य करते हैं, उन्होंने मुझे सलाह दी कि खाली समय में कुछ नया सीखने और अनुभव प्राप्त करने के लिए कश्मीर जाऊँ।
यह मेरी जिंदगी की पहली लंबी यात्रा थी। ट्रेन से सफर करने का अनुभव भी मेरे लिए बिल्कुल नया था। इससे पहले मैंने केवल छोटी दूरी की यात्राएँ की थीं। जब मैं अजमेर रेलवे स्टेशन पहुँचा और ट्रेन के अलग-अलग कोच जैसे स्लीपर और एसी कोच देखे, तो मुझे काफी उत्साह हुआ। ट्रेन यात्रा का यह नया अनुभव मेरे लिए बेहद यादगार रहा।
जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ती गई, मेरे मन में कश्मीर को लेकर उत्सुकता बढ़ती गई। मैं सोच रहा था कि वहाँ पहुँचते ही चारों तरफ बर्फ दिखाई देगी और मौसम बहुत ठंडा होगा। खासकर पठानकोट के बाद मैं लगातार खिड़की से बाहर देखता रहा, उम्मीद करता रहा कि अब बर्फ से ढके पहाड़ दिखाई देंगे।
लेकिन जब मैं जम्मू पहुँचा, तो मेरी कल्पना से बिल्कुल अलग दृश्य था। वहाँ काफी गर्मी थी। उस समय मुझे एहसास हुआ कि कश्मीर को लेकर हमारी कई धारणाएँ केवल तस्वीरों और फिल्मों पर आधारित होती हैं, जबकि वास्तविक अनुभव कुछ अलग ही होता है। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी सीख थी—किसी जगह को सच में जानने के लिए वहाँ जाना जरूरी है।
To Be Continued…) – अगले भाग में मैं श्रीनगर, डल झील, हाउसबोट और कश्मीर की खूबसूरत वादियों के अपने अनुभव साझा करूँगा
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